Sunday, December 20, 2015

Tokens in C Programming | In Hindi

आज का हमारा विषय है Tokens in C Programming इससे पहले वाली पोस्ट में हमने Structure of C Programming के बारे में पढ़ा था। जब भी हम Programming पढ़ते हैं तो इस बात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए की हमें Basics of Computer Programming अच्छी तरह से आते हों।

आइये अब शुरुआत करते हैं और जानते हैं की कैसे हम Tokens of C Programming का इस्तेमाल करके अपने प्रोग्राम को एक बेहतर प्रोग्राम में तब्दील कर सकते हैं।
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टोकन का सबसे पहला काम यह होता है की जब हम कोई भी प्रोग्राम बनाते हैं तो उसमे कुछ Keywords Declare करते हैं जिनकी मदद से  प्रोग्राम को आसानी से  बना सकते  हैं।  ये सभी कुछ न कुछ महत्त्व  अपना हर प्रोग्राम में रखते ही हैं।  और इसके कई प्रकार होते हैं जिन्हे कुछ इस प्रकार समझाया गया है  :-

Keywords :-  C Programming में  जब कुछ Keywords को हम Reserve कर देते हैं तो वो कम्पाइल में स्टोर हो जाते हैं और यह कम्पाइल को समझ में भी आ जाते हैं। इन सभी का उपयोग एक प्रोग्राम को पूरा करने के लिए किया जाता है। C Programming Language का एक नियम यह भी होता है की इसमें  छत्तीस Keywords  ही इसेमाल किये जाते हैं और किसी -किसी में तो इनकी संख्या बत्तीस ही होती है एवं किसी में इसकी संख्या छत्तीस को भी पार कर जाती है।





अब बात करते हैं Identifiers  की  जो दो प्रकार के होते हैं  "Variable" & "Constant"

जब कभी भी हम किसी Program को Develop करते हैं तो अलग-अलग तरह के Inputs का प्रयोग करके उन सभी के ऊपर Processing करते हैं।  कम्प्यूटर में जब  कोई भी काम करते हैं तो सबसे पहले Memory के अंदर Store करना होता है। जब तक हम उसको कम्प्यूटर की मेमोरी में स्टोर नही करते तब तक हम उस डेटा के ऊपर कोई भी काम नही कर सकते।
Computer के अंदर  Memory की हर एक Location का अलग-अलग  Unique Address होता  है। जब कभी भी   Computer में किसी डेटा के ऊपर कोई भी Processing  करते हैं तो वो अपने आप  Memory Location में Store हो जाता है।
लेकिन फिर भी हमें यह नही चल पाता की जिस काम को हम कर रहे हैं वो कम्प्यूटर में किस Location में स्टोर हो राहा है। जब हम सबसे पहले किसी डेटा पर कुछ भी प्रकिर्या करते हैं तो उसे हम अपनी मर्जी से किसी भी जगह स्टोर नही कर सकते क्योंकि उसे Operating System खुद की मर्जी वाली Location  पर स्टोर करता है। कम्प्यूटर जब हमारे Data को अपनी मेमोरी में Save करता है तो उसके लिए पहले से ही Memory  को  Reserve कर लेता है। और उसे कोई ऐसा नाम  है  जिससे  उसे  बाद में कभी  भी खोजा जा सके एवं हम इसे  Identifier कहते हैं।

नाम Assign करते वक्त ये भी ध्यान रखना जरूरी होता है की हम उन नियमों को ना भूले जो किसी भी Program  को C  Compiler चलाने के लिए जरूरी होते हैं। अगर किसी भी Identifier को Define करना है तो उसे हम Identifier Naming Convention के नाम से जानते हैं।



  • Identifier को  डिक्लेयर करते  समय  Upper Case या  Lower Case Character का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। 
  • Underscore का प्रयोग करके भी Identifier को परिभाषित किया जा सकता है। 
  • जब हम किसी Numeric शब्द का उपयोग करके Identifier  को  नाम देना चाहें तो उसके लिए भी पहला शब्द Character या  Underscore होना आवश्यक होता है। 
  • यदि हम  Special Symbol का  प्रयोग करके जैसे - Period, Comma, Blank Space इत्यादि का  प्रयोग करते हैं तो यह संभव नही है। 
  • C एक Case Sensitive Language है इसी वजह से इसमें Capital Letters और  Small Letters के नामो को अलग-अलग  माना जाता है। जैसे int Sum एवं  int sum दो  भिन्न प्रकार  के Variable Name  होंगे ना की एक जैसे। 

हम किसी भी Variable Identifier या  फिर Constant Identifier  का नाम  निचे दिए गए तरीके से  परिभाषित कर सकते हैं :-






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